Friday, March 26, 2021

मेंटल डिसऑर्डर

मैथोमानिया या स्यूडोलॉजिया फँसटास्टिका, एक साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसका लक्षण है- झूठ बोलना, लगातार, बिना किसी उद्देश्य के.. 

झूठ सभी बोलते है, अमूमन किसी गलती की सजा से बचने या किसी को हर्ट करने से  बचने के लिए। इसमे शारीरिक प्रतिक्रियाएं होती है, जिसे छुपा पाना कठिन होता है। मगर प्रेक्टिस के साथ इसपर कंट्रोल आ जाता है, आदमी कॉन्फिडेंस से झूठ बोलता है। इस स्किल की पहली शर्त है- उस झूठ को आप खुद पहले यकीन कीजिये। 

इस स्किल वाले व्यक्ति को अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर भी हो, (जिसमे आदमी अपनी ओर सबका ध्यान बार बार खींचना चाहता है), तो लगातार झूठ बोलना, यकीन के साथ बोलना..  , मानसिक हालत बिगाड़ता जाता है। 

व्यक्ति उस झूठ के मिथ में पूरी सच्चाई के साथ जीने लगता है। एक के बाद एक झूठों की श्रृंखला, जिसमे इंसान झूठ का पूरा महाकाव्य रच लेता है मैथोमानिया है  

झूठे किस्सों का वेब, जिसमे वह खुद या तो हीरो हो, या विक्टिम- जिससे शान बढ़े या सिम्पथि मिले, मैथोमानिया के लक्षण है। आदमी ज्यादा से ज्यादा किस्से बताने बनाने में लगा रहता है। एक अलग ही दुनिया मे, डिनायल में, फैंटेसी में जीता है। अब ऐसे व्यक्ति को सत्ता और बेपनाह ताकत हासिल हो, तो कल्पना कीजिये क्या होगा। 

इर्दगिर्द सिर्फ उन चापलूसों की फौज होगी, जो इन किस्सों को सुनेंगे, ताली पीटेंगे, या सिसकियां भरेंगे..  ड्यूटीफुली!! 
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यह अवस्था डीप इंसिक्युरिटी, अवसाद या इन्फिरियरटी कम्प्लेक्स से उपजती है। ट्रामा या हेड इंज्युरी भी इसे प्रेरित कर सकती है। ड्रग या नशे के एडिक्ट भी इस मैथोमानिया से पीड़ित होते हैं । आत्मदया के साथ बेहद क्रूर स्वभाव इसके परिणाम होते हैं। ऐसा व्यक्ति, भीरू होता है, मगर झटके में कोई भी इम्पलसिव डिसिजन ले सकता है। कोई भी ..   

अकारण झूठ बोलना आम तौर पर स्वस्थ मस्तिष्क में नही होता। ऐसे व्यक्ति, प्रथम बार मे मिलने पर विश्वास और नजदीकी का अहसास देते है। दिल खोलकर रख दिया अगले ने, ऐसा अहसास आपको बड़ी क्लोजनेस का यकीन देता है। की गई बातें, कोरी गप्प थी, ऐसा सोचने का आपके पास कोई कारण नही। 

मैथोमानिया के लक्षण इस तरह के हैं

1- अकारण, बिना लाभ, बिना किसी ऑकवर्ड सिचुएशन के झूठ बोलना
2- किस्से- लम्बे, डिटेल, वेल अर्टिकुलेटेड, रीजनिंग के साथ
3- किस्सों में वक्ता का हीरो, या विक्टिम होना। उसकी गलती कभी नही होगी। वह खुद ब्रेव और बेनोवेलेंट होगा। 
4- वो खुद फैक्ट और फिक्शन का अंतर भूल चुके होते हैं। उन किस्सों को वास्तविक मेमरी की तरह याद रखते हैं। मगर समय के साथ उन मेमरीज में इंप्रूवमेंट होता रहता है। उसी किस्से में बहादुरी या दुख का एक नया क्षेपक जुड़ जाएगा। एक ही स्टोरी के कई वर्जन होते है। 
5- ये नैचुरल परफॉर्मर होते है,, कन्विसिंग होते है। ये बरसों की प्रेक्टिस से उपजाई गयी स्किल है। ये एफर्टलेस होती है। 
6- प्रश्न किये जाने पर लम्बा उत्तर देंगे, जो कोई औऱ किस्सा हो सकता है। मगर मूल सवाल, कभी जवाब में नही एड्रेस होगा। 

राजनीति में मैथोमानिया  यह एक ईश्वरिय गिफ्ट हो सकता है। प्रशासक के लिए यह शाप है। प्रशासित जन के लिए, प्रशासित राज्य के लिए एक शाप है  

पर आत्माभिशापित जनता के लिए यह मनोरंजन का विषय हो सकता है।

Sunday, March 7, 2021

स्त्री दिवस

प्रेम में अक्सर समझदारी खो जाती हैं। खो जाते हैं पुराने चेहरे। एक दायरे में सिमट जाती हैं दुनियां। 
प्रेम में पड़ी स्त्री का संसार अलग हो जाता है।  भावनाओं के विशाल संसार में सोती- जागती   वो सपने बुनने लगती हैं, कल्पनाओं में प्रेमी को मुस्कुराते देखती हैं और बुदबुदा कर हवाओं के जरिए मौसम के नाव पर संदेश भेजती हैंं।
अपने प्रेमी को कभी हारते हुए नहीं देखना चाहती और उसे जिताने के लिए सबकुछ दाव पर लगा देती हैं। 
वह हवाओं के संग कभी तेज कभी मद्धम-मद्धम ऐसी जगह जाना चाहती हैं जहां उसके भावनाओं का विशाल साम्राज्य कायम रहे। बादलों का रंग बिरंगी पंख लगाएं दूर तक यात्राएं करना चाहती हैं यह जानने को- की उसका प्रेमी कितना दूर लेे जा सकता हैं। 
वह चिड़ियों की तरह होती हैं, जो उड़ना चाहती हैं। आज़ादी उसे पसंद होता हैं, और जो अपने प्रेमी को भी बदलो के पार ऊंचाइयों पर ले जाने को बेचैन होती हैं। 
कल्पनाओं में तिनके- तिनके जोड़ कर स्त्री अपने प्रेमी के साथ एक खूबसूरत महल बनाती हैं और जब प्रेमी के आंखो में अपने लिए प्रेम नहीं देखती तो हक्कीबक्की हो अंधेरों में खोने लगती हैं इस इंतज़ार के साथ की उसका प्रेमी आंखो में वहीं प्रेम लिए उसे ढूंढने आएगा।
लेकिन उसका प्रेमी, प्रेम रहित आंखो से झूठ बोलता हैं और वो टूट कर बिखर जाती हैं।
बिखेर देती हैं अपने ही हाथों से वो तिनका, कंकर- पत्थर जिससे अपने प्रेमी के लिए सपनों का महल बनाई हुई होती है। 
अब वो स्त्री एक नए रूप में सामने आती हैं जो अपने पर काट चुके प्रेमी को रुला कर खुश होती हैं और जमाने के लिए सख्त होती चली जाती हैं। 
स्त्री का सख्त हो जाना खतरनाक हैं और उसे सख्त बनाना अपराध।