प्रेम में अक्सर समझदारी खो जाती हैं। खो जाते हैं पुराने चेहरे। एक दायरे में सिमट जाती हैं दुनियां।
प्रेम में पड़ी स्त्री का संसार अलग हो जाता है। भावनाओं के विशाल संसार में सोती- जागती वो सपने बुनने लगती हैं, कल्पनाओं में प्रेमी को मुस्कुराते देखती हैं और बुदबुदा कर हवाओं के जरिए मौसम के नाव पर संदेश भेजती हैंं।
अपने प्रेमी को कभी हारते हुए नहीं देखना चाहती और उसे जिताने के लिए सबकुछ दाव पर लगा देती हैं।
वह हवाओं के संग कभी तेज कभी मद्धम-मद्धम ऐसी जगह जाना चाहती हैं जहां उसके भावनाओं का विशाल साम्राज्य कायम रहे। बादलों का रंग बिरंगी पंख लगाएं दूर तक यात्राएं करना चाहती हैं यह जानने को- की उसका प्रेमी कितना दूर लेे जा सकता हैं।
वह चिड़ियों की तरह होती हैं, जो उड़ना चाहती हैं। आज़ादी उसे पसंद होता हैं, और जो अपने प्रेमी को भी बदलो के पार ऊंचाइयों पर ले जाने को बेचैन होती हैं।
कल्पनाओं में तिनके- तिनके जोड़ कर स्त्री अपने प्रेमी के साथ एक खूबसूरत महल बनाती हैं और जब प्रेमी के आंखो में अपने लिए प्रेम नहीं देखती तो हक्कीबक्की हो अंधेरों में खोने लगती हैं इस इंतज़ार के साथ की उसका प्रेमी आंखो में वहीं प्रेम लिए उसे ढूंढने आएगा।
लेकिन उसका प्रेमी, प्रेम रहित आंखो से झूठ बोलता हैं और वो टूट कर बिखर जाती हैं।
बिखेर देती हैं अपने ही हाथों से वो तिनका, कंकर- पत्थर जिससे अपने प्रेमी के लिए सपनों का महल बनाई हुई होती है।
अब वो स्त्री एक नए रूप में सामने आती हैं जो अपने पर काट चुके प्रेमी को रुला कर खुश होती हैं और जमाने के लिए सख्त होती चली जाती हैं।
स्त्री का सख्त हो जाना खतरनाक हैं और उसे सख्त बनाना अपराध।
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