Monday, August 18, 2025

वो जो हम पीछे छोड़ आए

"वो जो हम पीछे छोड़ आए"
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प्रकृति जल्द ही उन सारी चीज़ों को वापस ले लेती है,
जिन्हें हम पीछे छोड़ देते हैं —
चाहे वह कोई जगह हो,
कोई रिश्ता,
या अपनी ही कोई पुरानी आदत।

वो हमें जीने देती है जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
लेकिन भीतर ही भीतर वह हर अधूरी चीज़ को
अपने नियमों में पिरोने लगती है।

फिर एक दिन,
जब हम अपने ही जीवन से थोड़े दूर हो जाते हैं —
वो सब कुछ लौट आता है:
किसी पुराने रास्ते की पहचान,
किसी आवाज़ की टीस,
या किसी मौसम की आहट जो जानी-पहचानी लगती है।

हम समझ नहीं पाते कि यह क्या है,
पर भीतर कुछ हिलता है —
जैसे कोई भूला हुआ हिसाब
अचानक फिर से ज़िंदा हो गया हो।

प्रकृति कभी कुछ फेंकती नहीं,
वो सिर्फ इंतज़ार करती है —
कि कब हम फिर उसी मोड़ पर पहुँचें,
जहाँ से चलने का ढंग बिगड़ा था। 

Avinash Pandey 

@highlight 

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