खूबसूरत लोग
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दुनिया का सबसे खूबसूरत जगह प्रकृति से दो- दो हाथ रोज करता हैं। हवाओं से बाते करता हैं। तूफानों से डिगता नहीं... पेड़ों को सुनता है। पत्तियों का आना और जाना देखता हैं। बर्फ की ठंडक के साथ करवटें बदलता वो जमीन सूर्य की किरणों से चमक जाता हैं।
पेड़ यहां शिकायत नहीं करते। पक्षियों को किसी से जलन नहीं होता। जानवरों को राजनीति नहीं आती। जल... नदियां रुक कर आराम की नहीं सोंचते। पहाड़ का सीना कभी झुकता नहीं और घाटियां अपना रहस्य आसानी से किसी को बताती नहीं ...
मै भी गुजरता हूं इन रास्तों से और मैंने भी पेड़ों को गाते सुना हैं। चिड़ियों की साज जैसे पहाड़ को मूर्तिवत कर देती है।
हवाऐं पूछती है क्यों आए हो? जबाव में हवाओं को गले लगाना पड़ता है और हवाएं कई राज की बातें करती जहैं।
इस दुनियां के सबसे खूबसूरत आदमी भी प्रकृति से दो-दो हाथ रोज करते हैं।
उन्होंने हार देखी है, निराशा के दलदल में डूबे- उतराए हैं, रोए हैं... चीखे हैं... चिल्लाए हैं, प्यार किए हैं और अवसादग्रस्त हो फिर चुप से हो गए हैं।
अकेलापन को जीते वे असुरक्षा से थरथरा कर कांपे हैं, रहस्यमई रातों में तकिया गीला किया है और फिर एक दिन वे उठ खड़े हुए हैं। ज्यादा संवेदनशील हो दूसरों के भावनाओं का कद्र करना सीख जाते हैं।
ऐसे खूबसूरत लोग अब डरते नहीं और ना किसी को डराते हैं। जिन्दगी को समझते हैं, उसकी चाल से प्रश्न नहीं पूछते।
खूबसूरत लोग जन्म नहीं लेते हैं...! बन जाते हैं।
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