Thursday, May 7, 2020

आप कितने खुश है

लॉक डाउन सबकी हंसी गुम कर चुका है। कुछ अभी भी मुस्कुरा सकते है।
आपकी परेशानियां इस बात पर निर्भर करती है कि आप भविष्य कि आशंकाओं के लेकर कितने चिन्तित है।
असल में हमारा दिमाग सूचनाओं का पुलिंदा है जो हमारे विचारो से नियंत्रित होता है। संकट को हर व्यक्ति वैसे ही देखता है जैसा उसके अंदर विचार है। पॉजिटिव विचार कुछ खास कैमिकल यानिं हार्मोन्स का स्राव कर हमे खुश करते है तो नेगेटिव विचार तनाव पैदा करने वाले कार्टिसोल हार्मोन्स पैदा कर तनाव देते है।
अभ्यास से नकारात्मक विचारो को कम और सकारात्मक विचारों को ज्यादा किया जा सकता है पर इसके लिए विचारो के ऊपर  हमें फिल्टर लगाना होगा जो तुरंत नकारात्मक विचारों को छान कर बाहर का रास्ता दिखाएं मन में घुसने ही नहीं दे और सकारात्मक विचारों को पोषित करे।
इसके बाद हम दिमाग की केमिस्ट्री यानी हार्मोन्स के संतुलन पर खुद अच्छा प्रभाव डाल सकते है। यही केमिस्ट्री हमारे फिजिक्स यानी शरीर पर भी असर डालकर बीमारी से बचाती है।

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