Tuesday, October 29, 2019

Absence of Trust Fear Rules. लव का खेल।

Absence of trust fear rules.

दो डरे हुये लोग अपने –अपने अकेलेपन- बोरियत से परेशान है । साथ हो लेते है । एक खेल खेलते है जिसे वे लव कहते है। तो क्या हुआ जब आपको अपने अकेलापन के लिए अपने बोरियत को दूर करने के लिए कोई और अच्छा साधन मिल जाए ? या फिर संबंधो मे ऐसे लगे जैसे-जो सोचा था वैसा तो कुछ नहीं। क्योकि डरे हुये लोग, अपनी इच्छावों को पूरा करने के लिए संबंध बनाने वाले लोग, अपनी महत्वाकांछा को पूरा करने के लिए संबंध बनाने वाले लोग  और अकेलापन को दूर करने के लिए संबंध बनाने वाले लोग, क्या वाकई एक दूसरे को खुशिया दे सकते है? 
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कुछ ही दिनों मे दोनों एकदूसरे से ठगा महसूस करने लगते है आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है । दिलचस्प बात तो तब देखने को मिलता है जब यह महसूस करने के वावजूद की दोनों को एक-दूसरे का 
साथ पसंद नहीं, यह साथ सिवाए दुख के और कुछ नहीं देता फिर भी दोनों का अहंकार (ego) उलझाए रखने के लिए नए-नए तरीके खोजता है। एकदूसरे को गुलाम बनाने का खेल शुरू होता है और अनजाने मे ही जिसका साथ हमे लो-फील कराता है उसे ही हम अपनी दिनचर्या का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बना बैठते है ... हर पल ये अहंकार बदले की सोचता है, बजाए ये सोचने के की हम दोनों की खुशी किसमे है। कैसे उसे दुबारा गुलाम बनाए। बिना यह सोचे की गुलाम बनाने वाले अक्सर गुलाम बन जाते है,इसके लिए अनगिनत विचारो का सिलसिला और फिर बचकाना हरकते शुरू हो जाता है।    
नशे की हालत मे किए गए फैसले वक़्त आने पर अक्सर बदल लिए जाते है । 
           जब सब-कुछ सामान्य हो जाता है। सामान्य से मेरा मतलब काफी कुछ खो देने के बाद तो यह अहसास होता है की क्या मैंने जो कीमत चुकाई,वो मूल्य सही था? पर अफसोस! हर बार हमे अहसास यही होता है की वो कीमत बहुत ज्यादा थी जो हमने चुकाई।  
हर बार पास्ट मे जो हमने अपने अहंकार की अपनी इच्छाओ की अपने लालच की और अपनी अंधी दौड़ की  जो कीमत चुकाई है वो ज्यादा थी। आने वाले समय मे हर बार एक ही नतीजे पर हम पहुँचते है। हम पाते है की वो कीमत बहुत ज्यादा थी जो हमने चुकाई थी । 

   

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