Monday, October 28, 2019

या तो आप हीरो की तरह एक बार मरते है या फिर विलेन की तरह रोज रोज।

कदम कदम पर जहां मौत इंतजार करे,
बड़ा मजा है अगर जिंदगी की बात करें।
       विलेन हमेशा से ही हीरो से ताकतवर होते रहे है.लेकिन हीरो में कुछ बात ही ऐसी होती    है जिससे वो हमेशा ही जीतते जाता है.
कई बार मैं इस प्रश्न पर विचार करता हूं कि नायक कौन होता है? वह कैसे बनता है? और हर बार मैं एक ही निष्कर्ष पर पहुंचता हूं। बात-बात पर झलकती आपकी बहादुरी नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में किया गया आपका व्यवहार आपको नायक बनाता है। जब आपके हाथ-पांव फूल जाएं, जब झटका इतना ज्यादा हो कि वह आपके विवेक, संयम, धैर्य और ऐसी ही अन्य चारित्रिक विशेषताओं को जड़ कर दे,  तब आप वापस सामान्य होने के लिए कितनी सफल लड़ाई लड़ पाते हैं, यही है नायक होना, हीरो होना।
            हमारा मन दुख के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। तभी जीवन में खुशियां होते हुए भी दुख ही दिखाई देते हैं। चेहरे पर रहने वाली मुस्कान कहीं गुम हो जाती है।
शोधकर्ता सोन्या लिबोमर्सकी के अनुसार, व्यक्ति की खुश रहने की क्षमता का 40% हिस्सा अविकसित रहता है। यानी हम अपनी खुशियों को 40% तक बढ़ा सकते हैं। शेष 60% खुशियों में 10% परिस्थितियों से जुड़ी होती हैं और 50% खुशियां स्थिर रहती हैं।
एक ना को चाहिए तीन हां...
 बारबरा फ्रेडरिक्संस सकारात्मकता पर किए अपने शोध में यही कहती हैं। नकारात्मक (विलेन)  विचारों की इस ताकत को वह 3:1 के अनुपात से प्रस्तुत करती हैं। वह कहती हैं कि एक नकारात्मक विचार के असर को कम करने के लिए तीन सकारात्मक विचारों(हीरो) का होना जरूरी होता है।
 मैंने देखा है कि लोग जैसे ही अपने कर्मों और जीवन की जिम्मेदारी खुद लेना शुरू करते हैं, वे बहुत ऊर्जावान हो जाते हैं,  उनमें प्रेरणात्मक नजरिया बढ़ जाता है और संकल्प की दृढ़ता भी बढ़ती है। इसीलिए हीरो की तरह
गुलाम मानसिकता को किनारे कर-दुसरो में हीरो तलाशने से बेहतर हम खुद मौलिकता के साथ अपने आप का हीरो बन सकते है.अपने अंदर हीरो के गुण विकसित करे जैसे कमजोरो का साथ देना,बुजुर्गो के प्रति सम्मान,अन्याय का विरोध,मानवता को प्रधानता देना इत्यादि और जैसे ही ये गुण विकसित होते जायेगा, आप एक हीरो की तरह पहचान छोड़ते जायेंगे.
लेकिन विलेन हीरो से मजबूत होने के वावजूद हारता क्यों चला जाता है? ये ऐसे ही जैसे #व्हाई थिस कोलाबेरी सांग समझ में नहीं आने के वावजूद भी इमोशन को जगा देता है  :)
              दोस्तो,  आज बहुत से लोगों की जिंदगी टैंक में पड़ी मछलियों (विलेन)  की तरह हो गयी है,  जिन्हें जगाने के लिए कोई शार्क मौजूद नहीं है। अगर दुर्भाग्य से आपके साथ भी ऐसा ही हो रहा है,  तो आपको भी जीवन में नयी चुनौतियां स्वीकार करनी होंगी। आप जिस रुटीन के आदी हो चुके हैं,  आपको उससे कुछ अलग करना होगा। आपको अपना दायरा बढ़ाना होगा,  जिंदगी में रोमांच लाना होगा। नहीं तो बासी मछलियों (विलेन)  की तरह आपका मोल भी कम हो जाएगा। लोग आपसे मिलने-जुलने की बजाय नजर बचाते दिखेंगे।

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