और अंत में हमारे लिए जो सबसे कीमती होता है उसी को हम खो देते हैं और बच जाती है वो पल पल की यादे अहसास और उपस्थिति का छायाचित्र। वक़्त के साथ बहुत कुछ बदल जाता है- जरुरते, ख्वाहिशें, लोग भी और हम खुद भी।
सब अपने जीवन पथ पर जिम्मेवारियों को संभालने के लिए आगे बढ़ जाते है और उन जिम्मेवारियों के पहाड़ तले कहीं किसी कोने में वह कोमल सी मीठी पारिजात दबी पड़ी रहती है। फिर एक दिन वह भी मिट्टी के रंग में मिलकर पत्थरों के चारो बगल अदृश्य सा फैल जाती है। कभी फुर्सत के क्षणों में पीछे मुड़कर देखने पर उसकी एक झलक मिल जाती है। कभी सपनो में आकर मुस्कुराते हुए उन पहाड़ों को ढोने के लिए नई ऊर्जाआे का संचार भी कर देती है। बीतते समय के साथ कोई तूफानी बारिश उन पारिजात मिले मिट्टी को पत्थरों से हमेशा हमेशा के लिए अपनी तेज धार से धो देती है। और फिर बीज रूप में अवचेतन में रहते अंकुरित होने की लालशा लिए अगले जन्म तक का इंतज़ार...
समय गुजरने के साथ हम वो नहीं रहते जो कभी थे, समय के साथ अब हम वो हो जाते है जो खुद के लिए भी पहचान पाना मुश्किल होता है...
सब अपने जीवन पथ पर जिम्मेवारियों को संभालने के लिए आगे बढ़ जाते है और उन जिम्मेवारियों के पहाड़ तले कहीं किसी कोने में वह कोमल सी मीठी पारिजात दबी पड़ी रहती है। फिर एक दिन वह भी मिट्टी के रंग में मिलकर पत्थरों के चारो बगल अदृश्य सा फैल जाती है। कभी फुर्सत के क्षणों में पीछे मुड़कर देखने पर उसकी एक झलक मिल जाती है। कभी सपनो में आकर मुस्कुराते हुए उन पहाड़ों को ढोने के लिए नई ऊर्जाआे का संचार भी कर देती है। बीतते समय के साथ कोई तूफानी बारिश उन पारिजात मिले मिट्टी को पत्थरों से हमेशा हमेशा के लिए अपनी तेज धार से धो देती है। और फिर बीज रूप में अवचेतन में रहते अंकुरित होने की लालशा लिए अगले जन्म तक का इंतज़ार...
समय गुजरने के साथ हम वो नहीं रहते जो कभी थे, समय के साथ अब हम वो हो जाते है जो खुद के लिए भी पहचान पाना मुश्किल होता है...
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