Saturday, October 26, 2019

एक राजा का बोलना।

एक स्थान पर वाक शक्ति के बारे में बात करते हुए चाणक्य ने लिखा है कि राजा को एक बार ही बोलना चाहिए।
उन्होंने अर्थ स्पष्ट किया है कि आदेश देने के अधिकारी व्यक्ति को कम शब्दों में पूरी बात स्पष्ट रूप से कह कर निर्देश दे देना चाहिए।
किसी भी बात  को कहने में जब बहुत सारे शब्द लगे या बहुत देर तक कहना पड़े तो तीन खामियां स्पष्ट हो जाती है।
पहली की कहने वाला आदेश देने की वास्तविक अधिकारी नही है।
दूसरा, वह खुद अपने स्तर पर तय नही कर पा रहा कि आदेश और निर्देश कैसे हो। और तीसरा की उसमे इच्छा शक्ति और मजबूती का जबरदस्त अभाव है।
कहते है की वादे भी वहीं कर सकते है, जो अपनी बात पर कायम रहने का माद्दा रखते है। अपनी बात से मुकरना, छबि को ही नहीं, आत्मा को भी कमजोर बनाता है।
जो लोग अल्पभासी होते है या जो अपनी बात पर टिके रहकर दूसरे के उम्मीदों का ख्याल रखते है, उनकी प्रतिष्ठा अलग ही होती है। कम बोलने वालो से लोग उलझते भी कम है ।
उनके पास अपनी मजबूती के लिए शब्दों का भंडार होता है, पर वे उसका भी बेहद कंजूसी से, संभलकर इस्तेमाल करते हैं। 

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