एक चलता- फिरता हसता-बोलता आदमी
कभी नहीं सोचता की उसके जीवन में एक दिन
ऐसा आएगा
जब उसकी हंसी पर ताला लग जायेगा
वह मुसीबतों से नहीं डरता
लड़ने से नहीं घबराता
यहाँ तक की कई बार
मौत को घर से बाहर धकेल चूका होता है
ऐसा आदमी जब किसी दिन अचानक चुप हो जाता है
तो एक बहुत जरुरी आवाज़
हवा में घुलने से रह जाती है
फिर इसके बाद
कहां क्या - क्या होने से रह जायेगा
यह कौन किसको बता पाएगा
यह तो वह खुद भी नहीं जानता
की हवा में घुली हुयी उसकी हंसी
किन् बंद दरवाज़ों को खोलती थी
मैं नहीं जानता
ऐसी हालत में क्या किया चाहिए
सिवा इसके की थोड़ी देर के लिए
उसकी चुप में शामिल हो जाना चाहिए.
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